Friday, May 31, 2019

मैं हार गया हूं, आपकी जीत में

इस व्यवस्था के बीच मैं हार सा गया हूं जिसमें आम आदमी को हक मिलना उतना ही कठिन हो गया है जैसे मृग मरीचिका। सवाल यह है कि इस हारने वाली व्यवस्था को बनाने में भले ही सदियों लग गए हो, लेकिन तोड़ेगा कौन। इसलिए मैं कहता हूं मैं हार सा गया हूं आपकी जीत में अलवर रेप के परिजन भी हारे हैं, हापुड़ गैंगरेप के परिजन भी हारे हैं। ऊना के दलितों भी हारे हैं। गौरी लंकेश हो, नरेंद्र दाभोलकर हो, एमएम कलबुर्गी हो, गोविंद पानसरे हो यह सभी लेखक भी तो हारे हैं न इनका क्या दोष था कि वह सिर्फ लिखते हैं। इसके लिए भी उन्हें हारना पड़ा। मैं हैरान हो जाता  हूं। रोहित वेमुला हो, नजीब हो या अभी हाल ही में हुई  घटना की पायल तड़वी हो। इनको अपने हक के लिए  लिए  मरना पड़ता है। इस व्यवस्था ने  इन होनहार को खो दिया  लेकिन मैं इसे  हारना कहता हूं। इसमें उनके परिजन हार गए हैं। नोटबन्दी की लाइन में लगे 128 लोग जो मौत की नींद सो गए थे क्या वह उनके परिजन हारे नहीं है। गौ मांस की तस्करी, गौ मांस के रखने या बच्चा चोरी के शक में  मरने वाले  लोगों के परिवार  भी हारे हैं। अखलाक, अकबर खान, दूध व्यापारी पहलू खान, अकबर खान सहित तमाम मॉब लिंचिंग में मरने वालो के परिवार भी हार गए। अब आप भले ही जीत गए हो लेकिन मैं कहता हूं कि 12000 किसान जो साल में मौत को गले लगा लेते हैं तमाम अव्यवस्थाओं के चलते वो भी हारे ही तो हैं। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था मैं बहुत से लोग हारे हैं। इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट कहती है की 2014 से पहले गौ हत्या के शक में मात्र दो ही के सामने थे लेकिन 2014 के बाद 87 बड़े मामले सामने आए जिसमें 34 व्यक्तियों की मौत हुई 158 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जिसमें 50 परसेंट मुस्लिम शिकार हुए। नोटबन्दी की लाइन हो, किसान हो, जवान हो, गटर सफाई करने वाले मजदूर हो सभी हारे ही तो हैं जिसमें वह मौत को गले लगाते हैं तब भी न्याय नहीं मिलता है। यह कैसी व्यवस्था। इस व्यवस्था में कौन जी रहा है और कौन मर रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र,  राजस्थान  सहित तमाम राज्यों में दलितों को शादी में  घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया जा रहा। शादी उनकी, घोड़ी उनकी, रोड सबका फिर भी उनके साथ अत्याचार किया जा रहा है। मारपीट, गाली-गलौज, अपशब्द, जातीय शब्द। ये भी तो हारा हुआ वर्ग है न। इस व्यवस्था का। बेरोजगारी 45 साल में सर्वाधिक हो जाएगी लेकिन फिर भी आप जीत गए तो आपको जीत की मुबारकबा, लेकिन हारे भी बहुत हैं इसमें कोई शक है क्या। जीतना अलग बात है हारना भी एक अलग संघर्षों है। आप व्यवस्था ऐसी बना चुके हैं या बन गई है जिसमें आम आदमी तड़प उठा है, कराह रहा है। इसलिए मैं कहता हूं कि इस व्यवस्था नहीं हम हार से गए हैं।

Thursday, May 30, 2019

... दर्द भरी रात

यह बात गुरुवार 30 मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक का एग्जाम देकर लौटे थे उमस भरी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रहा था समय तो निकल गया और ड्यूटी का टाइम शुरू हो गया लेकिन एक कहानी मुझे जिंदगी भर रुलाती रही कि संघर्ष और जीवन में कितना अंतर है कैसी का कितना महत्व हम जानते हैं आज मुझे नींद लेने की बहुत जरूरत थी क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर के दौरान हम कोतवाली उरई और ट्रेन से कानपुर पहुंचे कानपुर स्टेशन पर रात्रि होने के कारण फर्श पर मैंने विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागे तो सुबह हो चुकी थी और चिड़िया अपना गीत गा रही थी मैं फिर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुआ मैं लगभग 40 50 हरजिंदर नगर पहुंचा जहां पर मेरा विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में सेंटर था मुझे परीक्षा में 10:00 बजे से शामिल होना था पहले गया था लेकिन नींद मुझे वहां भी सता रही थी क्योंकि सफर में और उससे पहले भी सोया नहीं था अब ए जिंदगी तो नींद लेने की कह रही थी लेकिन सपनों का भारत या सपना का मेरा जीवन कैसा होगा मुझे नींद लेना नहीं दे रहा दरअसल हम 10:00 बजे वीडियो देखकर भी एग्जाम में बैठ गए एग्जाम दिया एग्जाम और स्थान रहा ठीक भी नहीं था अच्छा भी नहीं जाता कहा जा सकता था लेकिन एग्जाम से लौटने के बाद बस में जब ठीक दोपहर के 1:00 बज रहे होंगे वहां से सफर करते करते शाम 4:00 बजे तक हम वापस बुराई लौट चुकी थी वहां से हम यहां से दरोगा दामोदर सिंह के साथ हम कोच आ गए जहां पर रात्रि में मुझे ड्यूटी करनी थी लेकिन बिजली ने इतना परेशान किया कि मुझे गहरी नींद आने के बाद भी मैं सो नहीं पा रहा था पसीने से तरबतर था हर बार नींद लगती थी और बिजली अपना आंख में चोली का काम कर रही थी इस आंख में चोली मैं जो मैं परेशान हो रहा था और इस परेशानी के समय जब मैं लिख रहा हूं मुझे पता है कि जीवन का एक कष्ट है यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ि यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य  यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य के ही रवाना हुआ मैं लगभ यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य के ही रवाना हुआ मैं लगभग 4 यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य के ही रवाना हुआ मैं लगभग 40 50 मिनट बाद हरजिंदर नग यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य के ही रवाना हुआ मैं लगभग 40 50 मिनट बाद हरजिंदर नगर पहुंचा जहां प यह बात गुरुवार की मई 2019 की है जब हम कानपुर से मंडी निरीक्षक कभी जानते करते थे दुश्वारी रात मुझे आज भी याद है कि मैं सो नहीं पा रा समय तो निकल गया और दीपिका ठानी शुरू हो गया लिखने कहानी मैसेज इन्हीं वह लाती रही कि संघर्षमय और जीवन में खान तरह पैसे का कितना मातरम जानते हैं कि आज मुझे नींद लेने की भागवत क्योंकि मैं 2 दिन से सोया नहीं 29 तारीख को सफर की दौरान हम कोतवाली उरई और रांझे कानपुर पहुंच एकांकी स्टेशन पर रात्रि होने की कारण हर्षवर्धन विश्राम की 2 घंटे बाद जब जागी तो स्वच्छ गीत और चिड़ियां अपना गीत गारी मैं सिर्फ अपने गंतव्य के ही रवाना हुआ मैं लगभग 40 50 मिनट बाद हरजिंदर नगर पहुंचा जहां पर मेरा विद्या निकेतन इंटर कालेज सेंटर था मुझे परीक्षा में 10:00 बजे से शाम लो ना था बस पहले गया था लेकिन नींद मुझे वहां विस्ता रही थी क्योंकि मिश्रा फार्म और उससे पहले ही सोया नहीं था अबे जिंदगी तू नींद लेने की कह रही थी लेकिन सपनों का भारत सपना का नीरज जीवन कैसा हो मुझे नींद लेना मेरा दरअसल हम 10:00 बजे वीडियो देखकर जी एग्जाम एग्जाम दज मराठी कवि सम्मेलन

Tuesday, May 28, 2019

हैरान करते तुम युवा, विपिन की अनकही कहानी

हैरान करते तुम युवा, विपिन की अनकही कहानी

विपिन सिंह राठौर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। पढ़ा-लिखा नौजवान जो कम बात करने का आदि हो कैसे डबल मर्डर कर सकता है। सोच कर स्तभ्ध था। लेकिन एक इच्छा भी जाग रही थी कि वे क्या कारण थे कि इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। मिर्जापुर माधौगढं जालौन। किशन किस्सू 9,10 वर्ष  , 97 हाईस्कूल प्रथम, 99 इंटर, बीएससी, mba लखनऊ, कानपुर सीपीएमटी कॉम्पटीशन डॉक्टरी लक्, ब्रजेन्द्र बड़े भाई, एकलौती लड़की 80 बीघा, पिता प्रधान मुन्ना सिंह , घटना  2009,10, शिमला तक आर्किल मटर बेचना

अफीम की खेती, अमन चैन बेमानी

अफीम की खेती, अमन चैन बेमानी

आपने अफीम की खेती की है।अब भला सोचिए कि जो आपने बीज रोपित किए थे। उनमें मौसम के अनुसार आपने पानी दिया धूप दी, छांव दी और सब कुछ दिया। अब आप सोच रहे हैं कि इससे अमन चैन आएगा। यह बेईमानी नहीं तो क्या है। आप जब अफीम की खेती करेंगे, बीज रोपेंगे, पानी देंगे तो इससे जो हवा चलेगी। वह नशीली होगी। लोग जहरीले होंगे। वातावरण दूषित होगा। लोग पगला भी सकते हैं। उन्मादी भी हो सकते हैं। इसके परिणाम सामने आने लगे हैं। आपने क्या सोचा कि इसका असर दूसरों पर होगा। इसका असर हमारे लोगों पर नहीं होगा। इसका असर इतना अध्यापक होगा कि पूरे देश में आग लग जाएगी। अब आप देश में अमन-चैन, तरक्की, विकास कैसे सोच सकते हैं। यह सोचना आपकी भूल होगी। आप देश में तरक्की की बातें करके अपने आप को गुमराह कर सकते हैं या जनता को बेवकूफ बना सकते हैं। आप समझ रहे होंगे कि मैंने क्या किया है। मैंने अपने घर में ही आग लगाने का काम किया है और अब बुझाने के लिए पूरा तंत्र लगा रहे हो। पहले खेती करने से पहले, बीज रोपने से पहले आपने कुछ नहीं सोचा। परिणाम भले ही आम जनमानस को भुगतना पड़े, लेकिन इसका असर आप पर भी होगा। आप कतई न सोचा कि मैं चैन से सो जाऊंगा। इसमें न आप सो पाएंगे, न रह पाएंगे और न ही जी पाएंगे ऐसा मेरा मानना है।