Thursday, February 25, 2010

बाल ठाकरे और उनका मराठी मानुष

बाल ठाकरे और उनका मराठी मानुस शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे आज जो मराठी मानुस की बात तेजी याद आने लगी है उसका कारण है कि उन्हें लोकसभा और बिधान सभा मै उनका जनाधार कम हो गया है उनको उनकी मराठी जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है तथा उनके भतीजे राज की पार्टी को १३ सीटें प्राप्त हुई इससे बोखलाए बाल ठाकरे ने एवं उद्धव ठाकरे दोनों ने उत्तर भारतीयों को बहार निकलने एवं पाक खिलाडियों का समर्थन करने वाले शाहरुख खान को भी उन्होंने देशद्रोही ही नही कहा वल्कि यहाँ तक कहा कि उन्हें पाक चले जाना चाहिए समझ से परे है कि शाहरुख़ ने यदि देश द्रोह किया है तो २००४ मै जब बाल ठाकरे ने पाक खिलाडी जाबेद मियांदाद को अपने बंगले मतोंश्री मै बुलाकर और सम्मानित करके क्या किया था वह देशद्रोह था या देशप्रेम समझ से परे है हैरानी तो तब होती है जब वे मराठी मानुस को अपने साथ लेने के लिए मुंबई मै छात्रों को पिटवाते है , पेपर देने नहीं देते है साथ ही दंगे करना उनका धर्म है वे भूल जाते है कि उनके पिता केशव सीताराम ठाकरे हिंदी के औसत दर्जे के कवि हुआ करते थे तथा प्रबोधंकर उपनाम से कविताये करते थे फिर हिंदी भाषियों का विरोध कैसा क्या सिर्फ राजनीती के खातिर हम देश को भी बाँटने की बात कब तक करते रहेगे इससे मराठी शिवाजी की आत्मा और देश को एकता , अखंडता मै पिरोने वाले सरदार बल्लभभाई पटेल की आत्मा को आसह्नीय कष्ट हुआ होगा जिस तरह से राज ठाकरे और बाल ठाकरे अपना अपना वोट बैंक बढाने के खातिर राजनीती कर रहे है वह सबसे गन्दी राजनीती का उदहारण है और केंद्र सरकार ने जो किया है उससे तो साफ लगता है की सरकार मुंबई और बिहार मै वोट बैंक के लिए आज तक चुप बैठी देखती रही और जैसे ही मराठी मानुस की बात देश मै तेजी से उठने लगी तो राहुल गाँधी मुंबई का दोरा करते है , जनरल की टिकिट लेते है और सकुशल लौटते है सोनिया जी को यह भी चोचना होगा की बिहार या उत्तर भारतीय लोगों के बेटे भी बिहार जाते है तो उनके साथ ऐसा क्यों होता है जिस तरह से बाल ठाकरे को दबाने के लिए राज को बढावा दिया जा रहा है

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