Wednesday, August 28, 2019

RBI सरकार को देगी 1.76 लाख करोड़, ... क्या मंदी से उभर पायेगा देश ?

RBI सरकार को देगी 1.76 लाख करोड़,
... क्या मंदी से उभर पायेगा देश ?
बैंकों का बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने लाभांश और अधिशेष कोष से सरकार को 1,76,051 लाख करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी। यह निर्णय पूर्व गवर्नर जनरल विमल जालान की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यों की सहमति के आधार पर लिया गया है। हालांकि रिजर्व बैंक भारत सरकार का ही उपक्रम है और सरकार को लगातार साल दर साल मदद भी करता है। लेकिन वह मदद अपनी शर्तों पर या यूं कहें कि अपनी क्षमता और देश के दूरगामी आर्थिक हालात को देखकर ही करता है। हालांकि आरबीआई ने अपने रिजर्व से से पिछले साल 50,000 हजार करोड़ रुपया सरकार को दिया था और पिछले 5 सालों में प्रति वर्ष 30 से 65 हजार करोड़ रूपया दिया है।
1962 में चीन युद्ध के दौरान आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर रिजर्व बैंक ने भारत सरकार को पैसा देने की पेशकश की थी, लेकिन युद्ध जल्दी खत्म हो गया गया और सरकार को पैसा की जरूरत नहीं पड़ी। दूसरी बार 1991 में रिजर्व लेने की स्तिथियाँ बनी थीं। हालांकि भारत सरकार ने विदेश में सोना बेचकर कर भरपाई पूरी कर ली। 1998 में पहली बार भारत सरकार ने रिजर्व लेने के लिए समितियां बनाई और विस्तार से चर्चा की गई कि किन परिस्थितियों में सरकार RBI से पैसा ले सकती है।  मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही सरकार रिज़र्व को लेना चाहती थी, लेकिन अर्थशास्त्रियों और गवर्नर जनरल के विरोध के चलते यह नहीं हो सका। सरकार ने जब ज्यादा दबाव डाला तो तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया। बाद में सरकार के करीबी रहे शक्तिकांत दास गवर्नर बनाये गये। वर्तमान समय में कुछ समय तक तो सरकार देश में आर्थिक मंदी को ही नहीं मान रही थी, जबकि ऑटो सेक्टर, टैक्सटाइल सेक्टर सहित अन्य क्षेत्र ने जबरदस्त मंदी छा गई। लोगों की नौकरियां जानी शुरू हो गई हो गई। फैक्ट्रियां बंद होनी शुरू हो गई, तब सरकार सचेत हुई और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रिजर्व की मांग की। इस निर्णय का विपक्ष और अर्थशास्त्री विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह रिजर्व विषम से विषम परिस्थितियों या युद्ध जैसे संकट में लिया जाता है। ताकि देश में बड़ा संकट खड़ा न हो और अभी ऐसी परिस्थितियों हैं ही नहीं। सरकार को रिजर्व लेने से पहले विभिन्न प्रकार के खर्चो में कटौती करना चाहिए था। लेकिन सरकार लेना ही चाहती है। उसका कहना है कि इस रिजर्व से अर्थव्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आ जाएगी और देश आगे बढ़ चलेगा।
......
अब कई सवाल हैं:-
क्या मंदी से उभर पायेगा देश?
क्या मंदी झेल रहे विभिन्न सेक्टर फिर से चल पड़ेंगे?
क्या लाखों की संख्या में बेरोजगार हो चुके लोगों को फिर से रोजगार मिल पायेगा?
क्या पहले से बेरोजगार बैठे लोगों को नया रोजगार मिलेगा?
क्या अर्थव्यवस्था पटरी पर दौड़ने लगेगी?
क्या देश तरक़्क़ी के रास्ते फिर से बढ़ चलेगा?
...ये सभी प्रश्न समय के गर्भ में हैं।
जो बतायेंगे कि सरकार का निर्णय कितना सार्थक और उचित था ?
सरकारें आती और जाती रहेंगी। देश बहुत बड़ा है। उसके ही हिसाब से सोचें।

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