Monday, December 12, 2011

दिखावटी दिखी मोंटेग सिंह अहलुवालिया की मुहीम

दिखावटी दिखी मोंटेग सिंह अहलुवालिया की मुहीम
मोंटेग सिंग अहलुवालिया का झाँसी आना वह आये थे बुंदेलखंड पॅकेज की समिक्चा करने आये थे। उन्होंने झाँसी समेत कई स्थानों का भ्रमण किया। तथा बुंदेलखंड पॅकेज की खामियों के लिए माया सरकार को जाँच करने को कहा। क्या मोंटेग जी चुनाव नजदीक आते ही दौरा क्यों किया। पॅकेज मै तो सुरु से ही भ्रस्टाचार हुआ था। तो पहले ही आ जाते तो थोडा सा अच्छा लगता । आखिर उन्होंने बड़े-बड़े वादे किये इससे फर्क क्या पड़ता है। सुध योजना आयोग के उपध्याथ को इसलिए आ गयी क्योकि उत्तर प्रदेश मै अपना जनाधार बनाना है। क्या हकीकत यही है की देश मै सिर्फ चुनावी माहौल मै सब याद अ जाता है। वर्ना तो एस पिछड़े छेत्र की सुध नहीं लेते है। चाहे राहुल की मुहीम हो या अन्य पार्टियों के नेतायो का दौरा सब अब सिर्फ आपना विकास करना चाहते है। पार्टी का जनाधार बढाना होता है फिर उन्ही पार्टी के छुटभैयों नेताओ द्वारा योजनाओ का घालमेल किया जाता है। सबसे बड़ी बात तो यह है की आज के समय मै कोई ब्यक्ति क्यों किसी पार्टी से जुड़ना चाहता है। मतलब साफ है की उसको अपना और अपने परिवार का घर भरना होता है। सो छोटे लोग भी जो स्थानीय स्टार के अपराधी होते है। विभिन्न पार्टियों से जुड़ जाते है। जिससे वे बचे रहे और कमाई भी होती रहे। यदि देश का सच मै विकास करना है तो सभी पार्टियों के नेताओ को मानसिकता बदलनी होगी। देश मै जनप्रतिनिधियों को बापिस बुलाने का अधिकार लाना होगा। इसके साथ ही छोटे दलों को समाप्त करना होगा। जिनका कोई जनाधार न हो उनको बहार का रास्ता संसद मै कानून बनाकर रोकना होगा। राजनीती मै यूवा लोगो को आगे आना होगा।

Thursday, February 25, 2010

सर्वेश्वर दयाल , गुलजार और इब्नबतूता

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने अपनी कविता मै मोरक्को यात्री इब्नबतूता जो वर्णन किया है उसको कभी भी कवियों ने अपनी रचनाओं मै जगह नही दी थी और जब सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने इसको अपनी कविता मै जगह दी थी इतिहास बताता है की उसने सर्वाधिक देशों की यात्रा की थी उसने एशिया के भारत ,चीन , म्यांमार, नेपाल तथा और भी पडोसी देशों की और उसने अपनी पुस्तक मै वर्णन भी किया है लेकिन सर्वेश्वर जी को पता नहीं था की इब्नबतूता इतना चर्चित हो जायगा लेकिन हमारी बोलीबुड का तो चुराने का इतिहास रहा है और जब गुलजार ने कविता की दो पंक्तिया चुरा ली तो बे कहते है की हमने गुनाह क्या किया है उन्होंने इश्किया फिल्म मै जो गीत दिया है "इब्नबतूता बगल मै जूता , पहनो तो करता है चुर्र चुर्र ................उड़ गयी चिड़ियाँ फुर्र
जबकि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता थी
"इब्नबतूता पहन कर जूता ,निकल पड़े तूफ़ान मै
थोड़ी हवा नक् मै भर गयी, थोड़ी भर गयी कान मै
कभी नाक को, कभी कान को ,मलते इब्नबतूता
इसी बीच मै निकल गया ,उनके पैर का जूता
उड़ते-उड़ते उनका जूता ,जा पहुंचा जापान मै
इब्नबतूता खड़े रह गए , मोची की दुकान मै

हमारे भारत देश मै जो शब्दों एवं कविता को चुराने का इक लम्बा इतिहास रहा है और गुलजार जी इसमे बहुत ही माहिर इंसान है इसलिए उन्होंने कविता की सिर्फ दो लेने ही चुराई है ताकि सर्वेश्वर दयाल को भी कुछ न देना पड़े और कापीराईटी अधिकार से भी बचा जा सके सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का भले ही इतिहास न रहा हो लेकिन इब्नबतूता का एक घुम्मकड़ यात्री के रूप मै इतिहास रहा है तथा हमारे गुलजार जी का भी उनसे बड़ा चुराने का (कविता ,पंक्तिया ,)इतिहास रहा है सो सर्वेश्वर दयाल जी इतिहास मै हर गये है

बाल ठाकरे और उनका मराठी मानुष

बाल ठाकरे और उनका मराठी मानुस शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे आज जो मराठी मानुस की बात तेजी याद आने लगी है उसका कारण है कि उन्हें लोकसभा और बिधान सभा मै उनका जनाधार कम हो गया है उनको उनकी मराठी जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है तथा उनके भतीजे राज की पार्टी को १३ सीटें प्राप्त हुई इससे बोखलाए बाल ठाकरे ने एवं उद्धव ठाकरे दोनों ने उत्तर भारतीयों को बहार निकलने एवं पाक खिलाडियों का समर्थन करने वाले शाहरुख खान को भी उन्होंने देशद्रोही ही नही कहा वल्कि यहाँ तक कहा कि उन्हें पाक चले जाना चाहिए समझ से परे है कि शाहरुख़ ने यदि देश द्रोह किया है तो २००४ मै जब बाल ठाकरे ने पाक खिलाडी जाबेद मियांदाद को अपने बंगले मतोंश्री मै बुलाकर और सम्मानित करके क्या किया था वह देशद्रोह था या देशप्रेम समझ से परे है हैरानी तो तब होती है जब वे मराठी मानुस को अपने साथ लेने के लिए मुंबई मै छात्रों को पिटवाते है , पेपर देने नहीं देते है साथ ही दंगे करना उनका धर्म है वे भूल जाते है कि उनके पिता केशव सीताराम ठाकरे हिंदी के औसत दर्जे के कवि हुआ करते थे तथा प्रबोधंकर उपनाम से कविताये करते थे फिर हिंदी भाषियों का विरोध कैसा क्या सिर्फ राजनीती के खातिर हम देश को भी बाँटने की बात कब तक करते रहेगे इससे मराठी शिवाजी की आत्मा और देश को एकता , अखंडता मै पिरोने वाले सरदार बल्लभभाई पटेल की आत्मा को आसह्नीय कष्ट हुआ होगा जिस तरह से राज ठाकरे और बाल ठाकरे अपना अपना वोट बैंक बढाने के खातिर राजनीती कर रहे है वह सबसे गन्दी राजनीती का उदहारण है और केंद्र सरकार ने जो किया है उससे तो साफ लगता है की सरकार मुंबई और बिहार मै वोट बैंक के लिए आज तक चुप बैठी देखती रही और जैसे ही मराठी मानुस की बात देश मै तेजी से उठने लगी तो राहुल गाँधी मुंबई का दोरा करते है , जनरल की टिकिट लेते है और सकुशल लौटते है सोनिया जी को यह भी चोचना होगा की बिहार या उत्तर भारतीय लोगों के बेटे भी बिहार जाते है तो उनके साथ ऐसा क्यों होता है जिस तरह से बाल ठाकरे को दबाने के लिए राज को बढावा दिया जा रहा है